Mirage Writings

Everything is mirage

I bleed my pen — 2nd Nov 2022

I bleed my pen

I bleed my pen,
Whenever my wounds ache
I bleed my pen,
Whenever my eyes are red
I bleed my pen,
Whenever i meet her in dream
I bleed my pen,
Whenever my heart gets split
by poniard of emotions.

©Aniketkohli

टूटे दिल से वो मोहब्बत निभाते चला गया! —

टूटे दिल से वो मोहब्बत निभाते चला गया!

कश के धुंए में वो उसकी यादों को उड़ाता चला गया,
ये तोह उसका नशा था जो वो खुद को भी भुलाता चला गया।

उसके आने का दिलासा दे खुद को भी समझता चला गया,
जो हसीं कभी हो ना सकी उसकी वो उसे ही मनाता चला गया।

जिस दरिये का पानी खारा हो गया उस समंदर में खुद को डुबाता चला गया,
जले ख़्वाब जहां उन लपटों में खुद को भी जलाता चला गया।

हर रात वो दिल की सर्द को बढ़ाता चला गया,
हर सुबह वो उसे ख़्वाबों में दफनाता चला गया।

फूटे शीशे में वो उसे खूबसूरत बताते चला गया,
वो चांद की रोशनी को सवेरा बताते चला गया।

वो फूल की पलकों से लहू बहाते चला गया,
टूटे दिल से वो मोहब्बत निभाते चला गया!

©अनिकेतकोहली

वो चांद और तुम! —

वो चांद और तुम!

वो चांद मुझे भी देख रहा है,
वो चांद उसे भी देख रहा है

मैं उस चांद में उसे देख रहा हूं,
वो भी उस चांद में मुझे देख रही होगी

वो चांद भी सोचता होगा हमें खुद में छिपा लेता,
इस दुनिया से आज़ाद कर वो हमें यूं मिला देता

वो चांद मुझे भी देख रहा है,
वो चांद उसे भी देख रहा है

मेरी रातों का सहारा बन चुका है अब यह चांद,
मैं ना सही मेरे लिए तुम्हारा बन चुका है अब यह चांद

तुम्हारी तलब का गुज़ारा बन चुका है अब यह चांद,
मेरे अधूरेपन का सहारा बन चुका है अब यह चांद।

©अनिकेतकोहली

दिल एक खिलौना है! —

दिल एक खिलौना है!

दिल एक खिलौना है
कभी हंसाता है कभी रुलाता है,
दिल एक खिलौना है
जो टूट कर भी साथ निभाता है,
दिल एक खिलौना है
कभी खुद को खुद ही के राज़ बताता है,
दिल एक खिलौना है
जो कभी खुद से मिलने से भी इतराता है !

© अनिकेतकोहली

फर्क नहीं पड़ेगा! — 1st Nov 2022

फर्क नहीं पड़ेगा!

टूट जाना, बिखर जाना
पर थाम लेना खुद को,
एक दिन आयेगा जब फ़र्क नही पड़ेगा।

दुनिया से छुपा लेना खुद को,
बुझी आग में जला लेना खुद को,
इन पत्थरों तले दबा लेना खुद को,
एक दिन आयेगा जब फ़र्क नही पड़ेगा।

इस दरिया को छलकने मत देना,
इस खामोशी को दिखने मत देना,
किसी कोने में जा ज़रा सा तड़प लेना,
एक दिन आयेगा जब फ़र्क नही पड़ेगा।

©अनिकेतकोहली

काश हम झूठे ही रह जाते! — 31st Oct 2022

काश हम झूठे ही रह जाते!

काश झूठे ही रह जाते
तो यह आंसू न आते,
न ही उन्हें ज्यादा कुछ हम बताते,
शायद प्यार बच जाता अगर कुछ सच हम छुपाते,
काश हम झूठे ही रह जाते।

सच्चे प्यार में जब सच्चाई आ गई,
गहरे रिश्ते में इक तन्हाई सी आ गई,
सच्चा बनते बनते दिल यह टूट गया,
दिल की ही सुनी थी जो तेरा साथ छूट गया।

काश आज भी तुम करीब होते, यूं दूर न जाते
काश अब भी दो पल वो प्यार भरी बातें कर पाते,
थोड़ा सा तो तुम भी हमे समझने की कोशिश कर पाते,
या काश, हम झूठे ही रह जाते।

सोचा था कभी तुम्हे धोखे में न रखेंगे,
सोचा था साथ जिएंगे और साथ मरेंगे,
इस रिश्ते को ज़रा और मजबूत करने को चाहा था,
पर वो खुदा कहानी तो कुछ और ही लिख रहा था।

पता नही अधूरापन कहां रह गया,
हम तुम्हे मना नहीं पाए
या तुम हमें समझ नही पाए,
पर हां, अगर हम झूठे रह जाते
तो शायद आज यह आंसू न आते!

©अनिकेतकोहली

गुनहगार —

गुनहगार

दिल से जो साथ है, दिल उनके लिए साफ है,
साजिशें है कातिल यह, गलतियां तो माफ है,
आंसू यह दिखते नहीं, तकलीफें तो राज़ है,
आंखों से कल दिखे, पर आंखों में आज है।

ख्वाईशें खत्म हुई, पर उसूल यह मरा नहीं,
चेहरों को देख लिया और दर्द कभी कहा नहीं,
सब बदला बदला सा है, पर लगे फर्क पड़ा नहीं,
दुनिया यह ज़ाम जैसी, नशा उतरा पर दिल यह भरा नहीं।

सच तो ना छुपे, तुम कितना छुपाओगे,
मुंह को जो फेरा कभी, तो बातें बनाओगे,
ज़रूरतें है लाज़मी, फिर अपनापन भी जताओगे,
वक्त जो बदले फिर, तुम फिर बदल जाओगे।

©अनिकेतकोहली

Blur! — 30th Oct 2022

Blur!

Sometimes it feels like an end,
Sometimes like a begining
I feel fresh as a morning,
sometimes I sink as an evening,

Sometimes it seems ok to be as I am,
Sometimes I am hungry for a change,
Sometimes i need someone to stay around me,
Sometimes i like to stay alone and far from friends.

When I turn back every ups and downs are visible,
When I step forward everything is blur,
Sometimes It feels that the journey is going go be so colourful,
Sometimes it seems the joys are going to be discolour.

I ain’t afraid of challenges, but I am sad to lose myself,
I am holding on past, but still pushing to move myself.

But everything is blur!

©Aniketkohli

मैं मुंतजिर, वो गुमशुदा! —

मैं मुंतजिर, वो गुमशुदा!

रास्ते काफी बदले से है,
आसरे भी अब टूटे से है,
वो मीठे बोल अब सुनाई नही देते,
मेरे फोन की घंटियां अब उसका नाम नही लेती।

पर जाने क्यों इक तालाश सी है,
टूटी ही सही पर जिंदा एक आस सी है,
कुछ ख़ुद में खोये है, कुछ तुम में
तुम्हारे लफ्ज़ कानों में आज भी गूंजते है।

हां टूटे है हम और तुम्हारे चुप ज़वाब,
पिरोये तो तुमने भी थे कई झूठे ख़्वाब,
सिफ़र है सफ़र मेरा, तुम्हारे बाद
ठहरा मैं मुंतजिर और तुम गुमशुदा।

अधूरे है हम, अधूरा लगे सब
इंतज़ार था वस्ल का पर मिले बस अश्क,
दुआएं भी न सुनी क्यों तूने ऐ ख़ुदा,
क्यूं मैं मुंतजिर, वो क्यूं गुमशुदा।

©अनिकेतकोहली

Design a site like this with WordPress.com
Get started