वो चांद मुझे भी देख रहा है,
वो चांद उसे भी देख रहा है
मैं उस चांद में उसे देख रहा हूं,
वो भी उस चांद में मुझे देख रही होगी
वो चांद भी सोचता होगा हमें खुद में छिपा लेता,
इस दुनिया से आज़ाद कर वो हमें यूं मिला देता
वो चांद मुझे भी देख रहा है,
वो चांद उसे भी देख रहा है
मेरी रातों का सहारा बन चुका है अब यह चांद,
मैं ना सही मेरे लिए तुम्हारा बन चुका है अब यह चांद
तुम्हारी तलब का गुज़ारा बन चुका है अब यह चांद,
मेरे अधूरेपन का सहारा बन चुका है अब यह चांद।
©अनिकेतकोहली
