टूट जाना, बिखर जाना
पर थाम लेना खुद को,
एक दिन आयेगा जब फ़र्क नही पड़ेगा।

दुनिया से छुपा लेना खुद को,
बुझी आग में जला लेना खुद को,
इन पत्थरों तले दबा लेना खुद को,
एक दिन आयेगा जब फ़र्क नही पड़ेगा।

इस दरिया को छलकने मत देना,
इस खामोशी को दिखने मत देना,
किसी कोने में जा ज़रा सा तड़प लेना,
एक दिन आयेगा जब फ़र्क नही पड़ेगा।

©अनिकेतकोहली