काश झूठे ही रह जाते
तो यह आंसू न आते,
न ही उन्हें ज्यादा कुछ हम बताते,
शायद प्यार बच जाता अगर कुछ सच हम छुपाते,
काश हम झूठे ही रह जाते।

सच्चे प्यार में जब सच्चाई आ गई,
गहरे रिश्ते में इक तन्हाई सी आ गई,
सच्चा बनते बनते दिल यह टूट गया,
दिल की ही सुनी थी जो तेरा साथ छूट गया।

काश आज भी तुम करीब होते, यूं दूर न जाते
काश अब भी दो पल वो प्यार भरी बातें कर पाते,
थोड़ा सा तो तुम भी हमे समझने की कोशिश कर पाते,
या काश, हम झूठे ही रह जाते।

सोचा था कभी तुम्हे धोखे में न रखेंगे,
सोचा था साथ जिएंगे और साथ मरेंगे,
इस रिश्ते को ज़रा और मजबूत करने को चाहा था,
पर वो खुदा कहानी तो कुछ और ही लिख रहा था।

पता नही अधूरापन कहां रह गया,
हम तुम्हे मना नहीं पाए
या तुम हमें समझ नही पाए,
पर हां, अगर हम झूठे रह जाते
तो शायद आज यह आंसू न आते!

©अनिकेतकोहली